Tuesday, April 13, 2010

कितना बदल गया इंसान






शेहेर की भीड़ से होकर जब आप घर पोहोचते है, तब उलझे से मन में कई सारे सवाल आते है। दिन भर के काम में ना जाने कितनी ऐसी घटनाए घटती हैं, जो हमें अनचाही चीजों के बारे में सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
फिर हमे कई परिवर्तन महसूस होने लगते हैं । एक समय जब सड़के और ट्रेने खाली हुआ करती थी, आज उन्ही सडको और ट्रेनों में हझारो की संख्या में लोग गुजरते हैं। ऐसे में कोई कही गिर जाता है, तो कोई उसे संभालने भागता है । और हम सोचते है कि इंसानियत के तौर पर आज भी इस संसार में कुछ बचा है। कई घटनाए ऐसी भी, जिन्हें देखकर इंसान की क्रूरता और निर्दयता महसूस होती है, और उसके सामंजस्य पर संकोच होने लगता हैं ।

कल ही की बात हैं। सुबह उठकर मैं दूध खरीदने गया था। घर के पीछे वाली गली से गुजरता, पंछियों की चहक सूनता हुआ मैं निकला। दूध लेकर वापस उस गली से गुजरा तो सामने एक विकृत दृश्य मैंने देखा। खून से लथपथ बिल्ली का एक बच्चा
सड़क के बीचो बिच तड़प रहा था। दर्द से बेहाल वह बच्चा वही सड़क पर लेटा अपने सर के बल घूम रहा था। किसीने बताया, कि एक रिक्षा ने उसे ठोकर मार दी थी। उसके कान के निचे से खून आ रहा था। खून भरे उस जीव को देखकर तो लोग दूर ही रेह गए। दूर से देखने वाले उन लोगो को देखकर बहुत गुस्सा आया। कोई उसकी मदद करना नाही चाह रहा था। मैं जैसे जैसे उसकी ओर बढ़ा, वह दृश्य और भी दर्दनाक और डरावना होता गया।


घर वापस लौटना था, हाथ मे दूध का थैला, मन मे उस बच्चे की सहायता करने की इच्छा...पर मैंने कुछ नही किया। हाथ पर हाथ धरे बस उसे तड़पता हुआ देखता रहा और कुछ देर बाद दर्द सेहेन न कर पाने के कारण वो बेहोश हो गया या शायद मर गया। और फिर भी मैंने उस बच्चे को हाथ तक नही लगाया...कारण? नही जानता...


शायद
बदलती हुई इस दुनिया मे, मैं भी कही बदल गया। प्रेम,दया और इन जैसी कई भावनाओ की जगह निर्दयता और अपक्षपात ने ले ली है। शेहेर की भाग दौड़ मे, मैंने भी गंभीर चीजों को नजर अंदाज़ करना सीख लिया। अपने काम से मतलब रखना, दुसरो के दुःख को तब तक संभालना जब तक वो हमारे
हाथों को मैला न करे। इन्ही बुनियादों पर चलने वाली इस बेरहम दुनिया को गालीया देने वाला 'मैं' उसी दुनिया का हिस्सा कब बन गया पता तक नही चला।

और मैं बस कहा करता था....
"
कितना बदल गया इंसान!!!"

-वैभव सोरटे

Monday, April 12, 2010

The Network Monologue



I don't have to tell you things are bad.
Everybody knows things are bad.
Banks are going busted.
Shopkeepers keep a gun under their counter.
Hooligans are running wild on the streets and there's nobody anywhere that seems to know what to do and there is no end to it.


We know the air is unfit to breath and our food is unfit to eat..
We sit watching our TV where some news caster tells us.."Today we had 15 homicides and 6 suicides and 63 violent crimes"..as if that's the way its supposed to be..
We know things are bad worst than bad..they are crazy..
Its like everything everywhere is going crazy...so we don't go out anymore..
We sit in our house and slowly the world we are living is getting smaller and smaller...and all we say is "pleaseeee!!! at least leave us alone in our living rooms...let me have my TV...my touch phone...my owen...my latest laptop...and I wont say anything just leave us alone.."




WELL I AM NOT GOING TO LEAVE YOU ALONE...I WANT YOU TO GET MAD!!!
I don't want you to protest...I don't want you to write...I don't want you to write to your congressmen because I don't know what to tell you to write..
...I don't know what to do about the depression and the inflation and the migrants and the water mafias and the crime on the streets.....ALL I KNOW IS FIRST YOU'VE GOT TO GET MAD!!! YOU'VE GOT TO SAY I AM A HUMAN BEING GOD DAMN IT...MY LIFE HAS VALUE!!
-The Network